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ऋतुएं बदलते ही हवा बदल जाती है। इस बदलते मौसम का असर हर किसी पर होता है । इसी तरह गर्मियों के मौसम सभी को परेशान कर देता हैं जैसे लू, तेज गर्मी से पसीना जिससे स्कीन की प्रॉब्लम बढ़ जाती हैं । नतीजा सौंदर्य की कमी, त्वचा में रूखापन इत्यादि ।इसलिए स्कीन की उचित देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है । आज के टॉपिक में ऐसी ही रोचक जानकारी देने जा रहे हैं तो आइए जाने गर्मियों में कैसे रखें अपनी त्वचा का ख्याल.
फेस वॉश चेहरे को फेस वाश से धोना चाहिए और हल्के हाथों से पूछते हुए चहरे पर गुलाब जल लगाइए ।
त्वचा की सफाई करने के तुरंत बाद आपको बाहर जाना है तो तेज अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचने के लिए किसी अच्छी कंपनी का सनब्लॉक जरूर लगाएं ।
तेज धूप के प्रभाव से झुलसी त्वचा को बचाने के लिए रोज एंटीऑक्सीडेंट विटामिन (vitamins) ए, सी और ई की एक गोली ले या फिर किसी ऐसी क्रीम का इस्तेमाल करें जो विटामिन ए और सी से युक्त हो ।
नियमित मालिश सिर्फ स्वास्थ्य के लिए नहीं बल्कि सौंदर्य की दृष्टि से भी जरूरी है कम से कम सप्ताह में एक बार बॉडी मसाज जरूर करें इससे आप तनाव मुक्त रहेगी और आपके चेहरे की ताजगी भी बनी रहेगी ।
आयुर्वेद में स्कीन केअर के अनेकों उपाय बताये गये हैं उनमें कुछ इस प्रकार
1. हल्दी का प्रयोग – हल्दी स्किन को गोरा बनाती है और एक अच्छी एंटीबायोटिक भी होती है ।
2. खीरे का प्रयोग – खीरे का रस अपने आप में बहुत अच्छा मॉइश्चराइजर है गर्मियों में प्रतिदिन खीरे का रस लगाने से चेहरे और त्वचा की चमक बनी रहती है।
3. आयुर्वेदके अनुसार पानी ज्यादा से ज्यादा पिए ताकि आपकी त्वचा में स्वाभाविक चमक बनी रहे । रोजाना 8-10 ग्लास पानी पीना स्किन के लिए बहुत ज्यादा अच्छा होता है।
4. अपने आहार में तली भुनी चीजें और जंक फूड खाने की बजाए हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज एवं रेशेदार फलों को शामिल करें ।
5. शहद का प्रयोग – त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने के लिए एक चम्मच शहद में आधा चम्मच चंदन पाउडर, आधा चम्मच खसखस मिलाकर चेहरे और शरीर पर लगाएं यह त्वचा को बहुत पोषण देता है।
6. दूध में आटे का चोकर मिलाकर त्वचा को कुछ देर हल्के हाथों से मसाज करें हल्का सूखने पर ताजे पानी से धो ले 1 टी स्पून दही आधा टीस्पून संतरे का जूस अच्छी तरह मिलाकर चेहरे पर लगाएं । 5 मिनट बाद पानी से चेहरा साफ कर ले। त्वचा में नयी क्रांति आ जायेगी ।
7. त्वचा को कोमल बनाने के लिए हफ्ते में एक-दो बार एक्सफोलिएट जरूर करें । खुद को अनावश्यक तनाव से दूर रखने की कोशिश करें । तनाव से त्वचा पर बुरा असर होता है सोने से पहले क्लींजर से अपना मेकअप उतारना कभी नहीं भूले क्योंकि बिना मेकअप उतारे सोने से त्वचा पर बहुत जल्दी झुर्रियां पड़ जाती है सौंदर्य के लिए बहुत जरूरी है भरपूर नींद ले प्रतिदिन 8 घंटे की नींद ले इससे आप आंखों के चारों ओर होने वाले डार्क सर्कल से बचे रहेंगे ।
8. गर्मियों में जब आप बाहर जाइए तो अपनी हैंडबैग में मिनरल वाटर से भरी छोटी बोतल रखना ना भूले कुछ देर बाद हल्का सा स्प्रे अपने चेहरे पर करती रहें यह फाउंडेशन को ताजा रखता और अपने चेहरे को ताजगी प्रदान करता है ।
वर्तमान में लोगों की दिनचर्या व्यस्त से व्यस्ततम होती जा रही है, जिसका परिणाम हो रहा है – रात में देर से सोना, सुबह देर से उठना, वर्जिश योग आदि से दूरी बनाए रखना, टीवी के सामने घंटों चिपके रहना, बाहर का उठ पटांग खाना – पीना, चाय कॉफी की भरमार इन सारे कारणों से हमारे शरीर का पाचन बिगड़ जाता है और जिसका कारण होता है पोषक तत्वों का अभाव ।
आयुर्वेद के अनुसार दोषो को साम्यवास्था मे लेकर आना ही आरोग्य है,इसके लिये आयुर्वेद में औषधि आहार विहार के साथ ही पंचकर्म का भी विधान है।
पंचकर्म एक ऐसी पद्धति है जिसमें बढ़े हुए दोषों यानी वात पित्त कफ को शरीर से निकाल दिया जाता है और जिन दोषों की कमी हो उन्हे उचित आहार औषध से शरीर में बढ़ाया जाता है जिससे शरीर में आरोग्य की स्थापना हो इसिलिए पंचकर्म को आयुर्वेद का गहना भी कहा जाता है । पंचकर्म में मुख्य रूप से तीन कर्म किए जाते हैं पूर्व कर्म, प्रधान कर्म, पश्चात कर्म ।
पूर्व कर्म
मानव शरीर में सारे दोष विचरण करते हैं मुख्य रूप से तीन दोषों से हमारा शरीर बना होता है वात पित्त और कफ इन्हीं दोषों को शरीर से निकालने से पहले उभारना बहुत जरूरी होता है इन दोषों को उभारने के लिए जो प्रक्रिया की जाती हैं उन्हें पूर्व कर्म कहा जाता है पूर्व कर्म में मुख्य रूप से दो कर्म होते हैं स्नेहन और स्वेदन स्नेहन से तात्पर्य ओयलिंग से होता है । स्नेहन मुख्य रूप से दो तरह से किया जाता है, एक प्रकार जिसमें स्नेह यानी तेल या घृत की उचित मात्रा रोगी को पिलायी जाती है। स्नेहन के दूसरे प्रकार मे तेल या घृत से पूरे शरीर में अभ्यंग या मालिश की जाती है । स्नेहन के बाद स्वेदन किया जाता है, जिसे आसन शब्दों में सेंक देना समझा जा सकता है ।
स्वेदन के कई प्रकार है जैसे, नाड़ी स्वेद, सर्वान्ग स्वेद, रूक्ष स्वेद । तेल से भली प्रकार शरीर की मालिश करने के बाद अच्छे से गर्म तरल,वस्तु या गर्म और औषधियों से शरीर की सिकाई करने को स्नेहन और स्वेदन कहते हैं यही पंचकर्म से पहले किए जाने वाले पूर्व कर्म है इनके करने से शरीर के जोड़ खुलते हैं तथा औषधियां अधिक कारगर होती हैं।
प्रधान कर्म
स्नेहन स्वेदन से खुले हुए शरीर पर प्रधान कर्म किया जाता है प्रधान कर्मी मुख्य रूप से पंचकर्म है इसके अंतर्गत पांच कर्म आते हैं जैसे वमन, विरेचन, आस्था पन अनुवासन वस्ति, शिरो विरेचन और रक्तमोक्षण आदि ।
1. वमन – वमन जैसे के नाम से ही ज्ञात है इसमें औषधियों का पान करा कर उल्टियां करवाई जाती हैं, जब कभी किसी मनुष्य के शरीर में कफ की मात्रा सामान्य से अधिक बढ़ जाती है तब उसे कफ जनित रोगों का सामना करना पड़ता है, यह रोग हैं ज्यादा समय तक चलने वाली सर्दी खांसी श्वास रोग मेदो रोग यानी मोटापा आलस्य, अजीर्ण, अपच, अरुचि, रक्तरोग, इन लोगों में रोगी को कफ बढ़ाने वाली और कफ निकालने वाली औषधियों का काढ़ा बनाकर पान कराया जाता है उसके बाद उसे वमन करवाकर उसके कोष्ठ को शुद्ध किया जाता है।
विशेष – हृदय रोग प्लीहा गुल्म अष्ठीला स्वर्भेद शिर: शूल तिमिर शंखक कर्णशूल, नेत्रशूल उदावर्त मुत्राघात से पीड़ित रोगियों को वमन नहीं कराना चाहिए ।
2.विरेचन :- विरेचन में विरेचन करवाने वाली औषधियों को रोगी को पिलाकर उसके कोष्ठ की शुद्धि की जाती है । विरेचन मुख्य रूप से पित्त के शमन हेतु किया जाता है । कुष्ठ, ज्वर, प्रमेह, भगंदर, उदर रोग और प्लीहा रोग और ब्रधन, गलगंड ग्रंथि विसूचिका अल्सर मुत्रघात क्रीमी कोस्ट विसर्प पांडू सिर शूल त्रिशूल उदावत नेत्र में जलन मुख में दाह हृदय रोग, व्यंग नीलिका नेत्र नासिका व मुख से स्त्राव होने पर हलीमक स्वास् कास कामला अपस्मार उन्माद योनि दोष शुक्र दोष में तिमिर अरोचक अविपाक वमन, शोध उदर रोग विस्फोटक रोग से पीड़ित व्यक्तियों को विरेचन देना चाहिए । जिस प्रकार अग्नि से जलते हुए घर में जब अग्नि शांत हो जाती है तो घर का जलना भी बंद हो जाता है उसी प्रकार विरेचन द्वारा पित्त के निकल जाने से उपर्युक्त रोग शीघ्र शांत हो जाते हैं।
विशेष :- मंदाग्नि अजीर्ण नूतन ज्वर मदत्यय अध्मान अंत: शल्य,आघात पीड़ित अति दारुण कोष्ठ, वमन के अयोग्य प्रकरण में क्षत से लेकर गर्भिणी तक जो व्यक्ति बताए गए हैं वह विरेचन के योग्य नहीं होते हैं ।
3. वस्ति :- जिस प्रकार कफ के हरण के लिए वमन, पित्त के हरण के लिए विरेचन उसी प्रकार वात के हरण के लिए बस्ती का उपयोग हमारे आचार्यों ने बताया है । बस्ती मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है आस्था पन बस्ती या निरूहा बस्ती जिसे रुक्ष बस्ती भी कहा जाता है यह मुख्य रूप से औषधियों के क्वाथ से दी जाती है । दूसरा प्रकार अनुवासन बस्ती का है जो स्निग्ध बस्ती कही जाती है यह मुख्य रूप से तेल घी दूध इत्यादि से दी जाती है ।
4. शिरोधारा :- यह भी पंचकर्म का एक प्रकार है जिसमें औषधियों की मात्रा को तरल में उबालकर काढ़ा तैयार किया जाता है उसके बाद इस काढ़े को ठंडा कर रोगी के सिर में दोनों भ्रू मध्य में बूंद – बूंद टपका कर औषधि गिराई जाती है जिसे शिरोधारा कहते हैं यह मुख्य रूप से सिर में पाए जाने वाले विभिन्न विकारों जैसे शिर शूल अधकपारी हाई ब्लड प्रेशर अनिद्रा इनसोम्निया इत्यादि रोगों में दिया जाता है ।
5. रक्तमोक्षण :- रक्त जनित अशुद्धि के कारण उत्पन्न होने वाले रक्तगत रोग की चिकित्सा के लिए रक्तमोक्षण प्रयोग में लाया जाता है यह एक आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है । रक्त से उत्पन्न होने वाली विभिन्न तरह की प्रॉब्लम का ट्रीटमेंट किया जाता हैं । इस पद्धति से अन्य रक्त जनित रोगों में भी रक्तमोक्षण का प्रयोग किया जाता है ।
यह मुख्य रूप से 5 प्रधान कर्म कहे जाते हैं जो पंचकर्म के अंतर्गत आते हैं पर पंचकर्म पूरा होता है, पश्चात कर्म के द्वारा । जब शरीर से बड़े पैमाने पर कफ या पित्त का निर्हरण किया जाता है वह भी वमन या विरेचन विधियों द्वारा तब शरीर बहुत ज्यादा कमजोर हो जाता है उस कमजोर शरीर को साधारण अन्न पान लाने के लिए कुछ समय लगता है इस समय अवधि में शरीर को बहुत ही हल्का आहार दिया जाता है इस हल्के आहार के देने का भी एक तरीका होता है शुरू के दो आहार बिल्कुल ही हल्के पेया के दिए जाते हैं उसके बाद उससे थोड़ा अधिक गहरा आहार दिया जाता है इस प्रकार 7 दिन के संसर्जन क्रम के पश्चात रोगी को साधारण आहार में लाया जाता है ।
इसी समय अवधि को संसर्जन क्रम या पश्चात कर्म कहा जाता है । इन कुछ दिनों की अवधि में रोगी को तरल आहार के साथ खिचड़ी इत्यादि दी जाती है । इस प्रकार पूर्व कर्म प्रधान कर्म और पश्चात कर्म को एक साथ मिलाकर पंचकर्म कहा जाता है ।
आज के भागदौड़ भरे जीवन में मनुष्य यदि समय निकालकर रितु अनुसार अपने शरीर से उभरे दोषों को पंचकर्म की विधि अनुसार समय-समय पर निरहरण करवाते रहें तो तब वह एक हेल्थी लाइफ जी सकता है, इसीलिए पंचकर्म आयुर्वेद का गहना है ।
दिल्ली के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर्स की बात करे तोआशा आयुर्वेदा पंचकर्म सेंटर दिल्ली एक बेस्ट ऑप्शन हैं। जहां आपका बेहतर ट्रीटमेंट दिया जायेगा ।
किसी भी बीमारी के बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करने के लिए आयुर्वेद बेस्ट विकल्प है ।आयुर्वेद में बिना शल्य चिकित्सा के किसी भी बीमारी को जड़ से खत्म करने की औषधि और साधन मौजूद है । इसके साथ-साथ आयुर्वेद मेंपंचकर्म विधि द्वारा बहुत ही कारगर उपाय किया जाता है । यह प्रक्रिया काफी जांची परखी बहुत कारगर सिद्ध होती है । जिसमें शरीर को पूरी तरह निरोग बनाने का काम किया जाता है ताकि औषधि का भरपूर लाभ शरीर को मिल सके । उनमें से एक हैं आयुर्वेद की पंचकर्मा पद्धति, तो आइए जानते है पंचकर्म विधि होती क्या है । पंचकर्म से दुरुस्त रखें अपना तन-मन –
पंचकर्मा (पांच तरह के कर्म) जैसा की इसके नाम से ज्ञात होता है इसमें 5 तरह का ट्रीटमेंट मरीज को दिया जाता है।
पंचकर्मा (पांच तरह के कर्म) जैसा की इसके नाम से ज्ञात होता है इसमें 5 तरह का ट्रीटमेंट मरीज को दिया जाता है
पहला स्टेप वमन थेरेपी – (उल्टी )
इस थेरेपी में उल्टी के माध्यम से शरीर के दूषित खट्टे , लवणयुक्त तत्वों को उल्टी द्वारा बाहर निकाला जाता है । इसमें मरीज को उल्टी आने की औषधि दी जाती है जिससे बार – बार उल्टी आती है और पेट में जमी हुई जहरीली गैस, वायु , वात -पित्त सभी उल्टी के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं । शरीर अधिक निरोग बनकर सक्रिय होकर कार्य करना शुरू कर देता है । जिन लोगों को अस्थमा की शिकायत होती है उनके लिए तो यह थेरेपी बहुत कारगर सिद्ध होती है ।
पंचकर्म पद्धति में दूसरा स्टेप विरेचन –
विरेचन प्रक्रिया में औषधियों द्वारा बार-बार दस्त लगने की दवा दी जाती है जिससे मल के द्वारा शरीर के सारे विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते है । आजकल ज्यादातर फास्ट फूड का चलन बन गया है ऐसे फूड मैदे से बने होते है और ऐसा खाना पेट में जाकर जम जाता है और विषाक्त पदार्थ बन जाता है । गलत खानपान की वजह से ही रोज पेट पूरी तरह से साफ नहीं हो पाता और पेट में दूषित पदार्थ जमा हुए रहते हैं जो कई बीमारियों की जड़ होते हैं विवेचन प्रक्रिया से पेट को पूरी तरह साफ बना दिया जाता है जिससे शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है और यह पद्धति मोटापा वाले व्यक्ति के लिए काफी लाभदायक है जिन लोगों को कब्ज की शिकायत रहती है उनके लिए तो यह थेरेपी वरदान है।
पंचकर्मा पद्धति का तीसरा स्टेप है नस्य क्रिया –
इस प्रक्रिया में नाक में औषधीय तेल डाला जाता है जो ऊपर सिर में जाकर विषाक्त पदार्थ को बाहर निकाल लाता है । कभी-कभी मरीज को हल्के हाथों से सिर पर मालिश भी दी जाती है । जिन लोगों को माइग्रेन वह डिप्रेशन की समस्या होती है उन लोगों के लिए यह प्रक्रिया बहुत ही राहत दिलाने वाली होती है और जिन लोगों के सिर में बालों की समस्या होती है वह भी इस प्रक्रिया से खत्म हो जाती है । इसके अलावा मस्तिष्क में जमी वात , कफ पित में भी यह प्रक्रिया काफी कारगर सिद्ध होती है ।
पंचकर्मा पद्धति का चौथा स्टेप अनुवासन वस्ती –
इस पद्धति में शरीर को पूरी तरह निरोग बनाया जाता है मरीज को भरपूर पौष्टिक आहार दिया जाता है वास्तव में तो यह पद्धति पंचकर्म विधि का आधार मानी गई है । मरीज को ज्यादा तरल पदार्थ दिए जाते हैं जैसे दूध, दही, घी, मक्खन आदि का सेवन करवाया जाता है जो पेट को पूरी तरह से साफ बना कर ऊर्जावान कर देता है । क्योंकि हमारे खान-पान में जितना तरल और पौष्टिक आहार रहेगा शरीर उतना ही सक्रिय होकर कार्य करने लग जाएगा । पुराने जमाने के लोग इसीलिए स्वस्थ रहते थे क्योंकि वे तरल पदार्थ ज्यादा लेते थे । उनके खानपान में दूध, दही लस्सी की भरमार होती थी ।
पांचवा स्टेप रक्तमोक्षण –
इस प्रक्रिया में शरीर में खराब खून को साफ किया जाता है। आयुर्वेदिक औषधियों के माध्यम से आपके शरीर के खून को शुद्ध किया जाता है इस प्रक्रिया से रक्त संबंधित सभी रोग ठीक हो जाते हैं जैसे अनीमिया, उच्च रक्तचाप, आदि ।
पंचकर्मा प्रक्रिया में बहुत सारे फायदे इस प्रक्रिया में शरीर को पूर्णतया दोषमुक्त बना दिया जाता है । जिससे शरीर में नई जान आ जाती है और नई स्फूर्ति से शरीर कार्य करने लग जाता है । इस प्रक्रिया में थोड़ा समय जरूर लगता है । थोड़ी धीरज की जरूरत होती है पर सभी बीमारियों को जड़ से खत्म कर देने का काम आयुर्वेद में होता है ।
इसके अलावा आयुर्वेद में योग क्रिया का भी सहारा लिया जाता है । प्राणायाम व योगक्रिया द्वारा असाध्य रोगों का सफलतापूर्वक इलाज किया जाता है । आशा आयुर्वेद सेंटर दिल्ली में कुशल एक्सपर्ट की देखरेख में योग क्रिया और पंचकर्मा विधि द्वारा मरीजो का इलाज किया जाता है ।
पंचकर्मा पद्धति से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है । आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन से कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है ना ही बहुत सारी महंगी दवाइयों का सेवन मरीज को कराया जाता है । और तो और जड़ी बूटी से निर्मित ओषधि खाने से मरीज के चेहरे पर चमक भी आ जाती है और शरीर में उत्साह बढ़ जाता है ।
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विंटर सीजन में यूं तो सब कुछ गुणकारी मिलता है जो हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिये लाभप्रद है जैसे इस मौसम मे मिलने वाली ताजा सब्जियां, गोभी बैगन टमाटर, पहाड़ी आलू, सेम शिमला मिर्च गाजर मूली पालक मेथी बथुआ आदि । इनका सेवन जहां आरोग्य प्रदान करता है वही एक अलग ही चुस्ती फुर्ती भी जगाता है, लेकिन सभी तरफ से स्वास्थ्यप्रद ये मौसम त्वचा के लिये थोड़ा कष्टकारी होता है ।
सर्दियों के मौसम मे चलने वाली तेज़ हवाएँ और और शीतलता चेहरे और आपकी त्वचा से इसकी प्राकृतिक नमी को चुरा लेती हैंं । प्राकृतिक नमी की कमी यानी त्वचा मे रूखापन, त्वचा के फटने की समस्या, त्वचा मे पड़ने वाली झाईं आदी की समस्या । पर जहां समस्या है वहीं समाधान भी हैं । आयुर्वेद एक ऐसी विधा है जिसमें हर समस्या का आयुर्वेदिक उपाय मौजूद है। तो आइए जानें ड्राई एवं रूखी त्वचा के लिये उपाय ( Ayurvedic Treatment For Skin) :-
तेल का प्रयोग :- नियमित रूप से दो से तीन बार नारियल तेल का प्रयोग करें तो त्वचा की रुक्षता में काफी हद तक कमी महसूस की जा सकती है । नारियल तेल के अभाव में जैतून का तेल बादाम का तेल तिल का तेल भी प्रयोग किया जा सकता है ।
विटामिन ई (vitamin e ) का प्रयोग :- बाजार में विटामिन ई के कैप्सूल इवियोन नाम से पाए जाते हैं । विटामिन ई से भरपूर इस कैप्सूल को दिन में 2 से 3 बार प्रयोग किया जा सकता है। यह काफी गाढ़े तरल के रूप में पाया जाता है । इस कैप्सूल को प्रयोग करने के लिए कैप्सूल में ऊपर से छोटा छेद करके उसे हाथ में निकाल ले और थोड़ा सा कोई भी तेल या पानी मिलाकर इसे रखी त्वचा वाली जगह पर लेप कर दें ऐसा दिन में दो से तीन बार करने पर रुखपन मे कमी आती है ।
एलोवेरा जेल :- इसे समान मात्रा में मलाई के साथ मिलाकर त्वचा पर दिन में 2 से 3 बार लेप करें तो लाभ होगा ।
रक्त चंदन, पठानी लोध्र और घोड़ बच में समान मात्रा में धनिया की पत्तियां मिलाकर पीसकर रुखी त्वचा वाली जगह पर दिन में कम से कम एक बार लेप करें आशा अनुरूप सफलता मिलेगी।
रूखी त्वचा को दूर करने के लिए सबसे ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत यही है कि त्वचा में नमी बनी रहे । कोई भी अच्छा विटामिन ई (vitamin e ) युक्त बॉडी लोशन शरीर में तीन से चार बार लेप करना लाभप्रद होता है ।
बादाम को पीस कर सूखे पाउडर को साफ सूखे डिब्बे में रख लें, और नहाने के पहले मलाई या दूध मिलाकर त्वचा में प्रयोग करें तरह पीस कर सूखे डब्बे में सहेज कर रखे व नहाने के पहले नियम से इसका प्रयोग त्वचा पर करें
रात में सोने के पहले किसी अच्छे मोइश्च्राईज़र का प्रयोग नियम से करे।
मोइश्चराइज़र के अभाव मे नारियल तेल भी चेहरे पर लगाया जा सकता है ।
नहाने के पहले नियम से मलाई लगाएँ ।
बहुत अधिक केमिकल युक्त साबुन का प्रयोग ना करें।
फुलक्रीम या मोइश्चराईज़र युक्त साबुन का प्रयोग करें।
त्वचा पर तरह तरह के मेकअप प्रसाधनों के अधिक प्रयोग से बचें ।
मेकअप करने के बाद नियम से सोने के पहले मेकअप उतारना ना भूलें । इन सभी बातों का ध्यान रख कर त्वचा की नमी को बचाये रखा जा सकता है।
शुष्क त्वचा का दिल्ली में आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट ( Ayurvedic Treatment For Skin In Delhi )
हेयरस्टाइल (hairstyle) किसी भी व्यक्ति की पर्सनालिटी में चार चांद लगा देते हैं पर ज्यादा सुंदर दिखने की चाह में महिलाएं अपने बालों पर केमिकल युक्त साबुन, शैंपू हेयर, कलरऔर ना जाने क्या-क्या चीजें इस्तेमाल कर लेती है। जिसका गलत परिणाम भुगतना पड़ता है । आजकल कई लुभावने हेयर प्रोडक्ट मार्केट में आए हुए हैं जो 5 दिन में बालों को लंबा, घना और मुलायम बनाने का झांसा देते है और महिलाएं बिना सोचे समझे इन प्रोडक्ट का इस्तेमाल अपने बालों पर कर लेती है और नतीजा हेयर फॉल से शुरू होकर गंजेपन तक चला जाता है ।
आयुर्वेद में कई ऐसे खजाने भरे हुए हैं जो हमारी रसोई में ही हमे आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं । जिनके इस्तेमाल से बाल घने व चमकदार तो बनते ही हैं इनके इस्तेमाल से बालों की सभी समस्याओं से छुटकारा मिलकर बाल बहुत मजबूत बनते हैं । आइए जानते हैं आयुर्वेद के पांच तरीके जिन को अपनाने से बाल लंबे और खूबसूरत बनते हैं ( Aayurvedic Treatment For Hair Loss And Regrowth )
मेथी दाने का प्रयोग— मेथी दाने में विटामिन ए विटामिन के और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । जो बालों की ग्रोथ (growth ) को बढ़ाकर बाल घने व चमकदार बनाता है । इसके अलावा मेथी दाने में फोलिक एसिड भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिससे बाल झड़ने की समस्या से छुटकारा मिलता है । बालों की सभी प्रॉब्लम से छुटकारा पाने के लिए मेथी का प्रयोग बहुत ही लाभदायक माना गया है ।मेथी को रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से शरीर को बहुत लाभ मिलता हैं और बाल मजबूत और घने बनते हैं ।
दही और मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग – दही में गुणकारी बैक्टीरिया होते हैं और प्रोटीन भी प्रचुर मात्रा में होता है ।दही बालों से रूसी को खत्म करता और बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है जिससे बाल घने चमकदार हो जाते हैं दही में मुल्तानी मिट्टी मिला ली जाए तो इसके औषधीय गुण बालों को मिलते हैं ।बालों में इसका लेप लगा कर 15 मिनट बाद साफ पानी से धो लेने से बाल एकदम साफ और चमकदार हो जाते हैं ।
रीठा – यह बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है । रीठा को कूटकर इसका चूर्ण बनाकर रात को पानी में भिगो दीजिए । सुबह छानकर इससे बालों को धो लीजिये बाल बहुत ही काले और चमकदार बन जाएंगे । इसके नियमित प्रयोग से बाल बहुत ही खूबसूरत हो जाते है ।
आंवला का प्रयोग – बालों के लिए विटामिन सी बहुत ही फायदेमंद होता है विटामिन सी के अभाव में बाल रूखे -सूखे होकर टूटने लग जाते हैं ।बहुत ही आसान । ठंडा होने पर बालों को धो लीजिये बालों की चमक देखते ही बनेगी ।
नीम की पत्तियों का उपयोग – नीम का आयुर्वेद में बहुत ही महत्व माना गया है नीम गुणों की खान होता है । नीम के पत्तों में औषधीय गुण होने के कारण यह त्वचा और बाल दोनों के लिए ही बहुत लाभदायक होता है। यह रूसी की समस्या से भी बालों को छुटकारा दिलाता है । बालों को जड़ से मजबूती प्रदान करता है । नीम के पत्तों को उबालकर इसके पानी से बाल धोने से बाल घने व चमकदार बन जाते हैं ।
इसके अलावा भृंगराज तेल का उपयोग भी आयुर्वेद में बहुत गुणकारी बताया गया है । यह एक औषधीय तेल है जो सिर में रक्त संचार को तेज करता है जो बालों को घना और मजबूत बनाता हैं ।
दिल्ली में बालो के आयुर्वेदिक डॉक्टर ( Ayurvedic Doctor For Hair In Delhi )
यदि आप आप बालों को प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं या बालो के बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर्स की तलाश कर रहे हैं तो आशा आयुर्वेदा सेंटर दिल्ली की डॉक्टर चंचल शर्मा बेस्ट डॉक्टर हैं । जहां आपके हेयर लॉस का बेहतर ट्रीटमेंट दिया जायेगा ।
आपने किसी के हाथ या पैर पर लाल या सफेद गोल चकता बना हुआ देखा होगा । वास्तव में वो एक फंगल इंफेक्शन होता है जिसे मेडिकल साइंस में सोरायसिस ( Psoriasis ) कहा जाता है । सोरायसिस एक स्किन रिलेटेड रोग है जो हवा में नमी के कारण या मौसम के बदलने पर ज्यादातर देखने में आता है । यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है । पर ज्यादातर 30 से 40 साल की उम्र वालों में यह विकृत रूप से दिखाई देता है । तो आइए जानते हैं सोरायसिस के कारणों के बारे में :-
1. यह एक फंगल रोग है जो कपड़े के गीले रेशों से भी उत्पन्न हो जाता है । इस रोग के होने पर त्वचा में शुष्कता आ जाती है और त्वचा फुल कर मोटी हो जाती है तथा बहुत तेज खुजली होती है । ज्यादा खुजलाने पर त्वचा में लाल लाल दाने उभर आते हैं और फिर यही दाने लाल चकते का रूप धारण कर लेते हैं ।
2. यह एक तरह की छूत की बीमारी मानी जाती है और कभी - कभी यह आनुवंशिक बीमारी भी होती है ।
3. सोरायसिस कोहनी, घुटनों, सिर व हाथ - पैर कहीं पर भी हो सकती है । एक बार हो जाने पर ये बीमारी जल्दी ठीक भी नही होती है । इसके इलाज में धीरज रखने की जरूरत होती है ।
4. यह बीमारी शरीर में इम्युनिटी सिस्टम में गड़बड़ी के कारण पैदा होती है ।
5. इम्यूनिटी सिस्टम खराब होने पर शरीर में स्किन संबंधित कई बीमारियां खड़ी हो जाती है । भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खानपान की वजह से या बहुत अधिक शराब का सेवन करने पर या फिर जिन लोगों की दिनचर्या सही नही होती है उन्हें यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है ।
6. दूषित व विषाक्त खाना खाने पर त्वचा संबंधित रोग निकल आते है । या फिर विरोधता पैदा करने वाली चीजों को एक साथ खाने पर स्किन प्रॉब्लम शुरू हो जाती है जैसे - दूध के साथ दही का सेवन नही करना चाहिये । घी व तेल को एक साथ मिलाकर नही खाना चाहिए ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनका आपस मे विरोधाभास उन्हें एक साथ सेवन करने से स्किन समस्या शुरू हो जाती हैं।
7. सही तरह से शरीर की देखभाल नही करने पर या फिर गीले व गन्दे कपड़ें पहनने पर या सीलनभरे अंडर गारमेंट्स पहनने से यह बीमारी तेजी से फैल जाती है । एक बार जब मरीज इसकी चपेट में आ जाता है तो जल्दी से यह बीमारी पीछा भी नहीं छोड़ती है ।
सोरायसिस ( Psoriasis ) के लक्षण
जैसा कि आप जानते हैं यह स्कीन से रिलेटेड बीमारी हैं । सामान्य शब्दों में दाद भी कहते हैं । इनके लक्षण शुरुआती दौर में ही दिखाई देते हैं जैसे
1. तेज़ धूप में जाने पर त्वचा में खिंचाव चालू हो जाता है ।
2. त्वचा पर बहुत तेज खुजली चालू हो जाती है । घाव से सफेद पपड़ी उतरती है व ज्यादा घाव बढ़ जाने पर सफेद पीप भी निकलने लगता है ।
3. मरीज को कभी कभी जोड़ों का दर्द भी चालू हो जाता है ।
सोरायसिस का दिल्ली में आयुर्वेदिक इलाज ( Ayurvedic Doctors For Psoriasis In Delhi ) :-
अगर हम बात करे देश की राजधानी दिल्ली में बेस्ट सोरायसिस के आयुर्वेदिक डॉक्टर्स की तो आशा आयुर्वेदा आयुर्वेदिक सेंटर एवं पंचकर्मा आयुर्वेदिक सेंटर दिल्ली मुख्य हैं । जहाँ आपको बेहतर इलाज मिल सकता हैं ।
आयुर्वेदिक उपचार किसी भी बीमारी को जड़ से खत्म करने की हिम्मत रखता है । आयुर्वेदिक दवाइयों के साथ पोष्टिक व सही खाने पर जोर दिया जाता है । मरीज को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ दिए जाते हैं ताकि शरीर में पानी की मात्रा कम ना हो पाए ।
1. सोरायसिस को आम बोलचाल की भाषा में दाद की बीमारी कहा जाता है । मरीज के कपड़ों को वह उसके बिस्तर को अच्छे से साफ रखना चाहिए वह अलग रखना चाहिए ताकि यह बीमारी फैलने ना पाए ।
2. कपड़ों को डिटॉल या नीम के पानी से धोना चाहिए । कुछ सरल तरीके से सोरायसिस का इलाज घर पर ही किया जा सकता है ।
3. छाछ का प्रयोग - आयुर्वेद में छाछ को एक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है । छाछ से पेट साफ तो होता ही है नियमित दोपहर में छाछ का प्रयोग करने पर खाना अच्छे से डायजेस्ट हो जाता है । स्किन में क्रांति आ जाती है स्किन ज्यादा चमकदार होकर नए सेल्स पैदा करती है । छाछ का नियमित सेवन पेट व स्किन सम्बंधित कई बीमारियों से दूर रखता है ।
4. नीम का प्रयोग - नीम के पत्ते त्वचा संबंधी रोगों में काफी कारगर साबित होते हैं । नीम के पत्तों का प्रयोग लोशन में या साबुन के रूप में किया जाता है ।पानी में नीम के पत्तों को उबालकर उस पानी से घाव वाली जगह को धोने से तुरंत आराम मिलता है ।नीम के तेल को त्वचा पर लगाने से मुंहासे , दाद ,खाज ,खुजली त्वचा संबंधी सभी रोगों में तुरंत फायदा होता है ।
5. विरेचन की प्रक्रिया - गलत खानपान की वजह से रोज पेट साफ ठीक से नहीं हो पाता है । जिसके कारण कई बीमारियां घर कर लेती है । पंचकर्मा की विरेचन प्रक्रिया में रोगी को जड़ी बूटियों से बनी दवाइयों व चूर्ण वगैरह खिलाए जाते हैं जो पेट के इम्यूनिटी सिस्टम को ठीक करते हैं व पेट में जमा हुआ सारा मल बाहर निकाल देते हैं ।
6. आयुर्वेदमें दवाई से ज्यादा पौष्टिक आहार पर जोर दिया जाता है । जिससे शरीर में पोषक तत्व भरपूर रहे वह रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाये । पोष्टिक आहार से त्वचा ज्यादा ऊर्जावान हो जाती है । तली हुई चीजें फास्ट फूड और मैदे से बनी चीजों से पूर्णता परहेज करने की सलाह दी जाती है । गलत खानपान की वजह से ही हम जाने-अनजाने कितनी बीमारियों की चपेट में आ जाते है अतः आयुर्वेद में हमेशा घर पर बना पौष्टिकता से पूर्ण खाने पर ही जोर दिया जाता है ।
7. सन के बीज - सन के बीज शरीर में आई सूजन को कम करते हैं । इसके नियमित प्रयोग करने से त्वचा साफ व चमकदार हो जाती है ।
8. योग की सलाह - आयुर्वेद में हर बीमारी में योग को प्राथमिकता दी जाती है योग से कई बीमारियों का इलाज सरल हो जाता है । सुबह-सुबह ताजी हवा में सैर करने की सलाह दी जाती है । ताकि खुली हवा में सांस लेने से शरीर में नई स्फूर्ति का संचार होता है । इसके साथ ही प्राणायाम करने से शरीर को शुद्ध वायु मिलती है । शरीर से नकारात्मकता भाग जाती है । शरीर और अधिक ऊर्जावान बन जाता है ।
9. प्राणायाम मे ॐ मंत्र का उच्चारण - गहरी सांस लेते हुए ॐ शब्द के उच्चारण करने से फेफड़ों में नई जान भर जाती है । नियमित अनुलोम -विलोम के साथ कपाल भारती करने से रक्त संचार ठीक होता है और हमारे उत्तकों में नई प्राणवायु भर जाती है । और त्वचा भी जवाँ दिखने लग जाती है ।
बालो का झड़ना आम बात हैं । आये दिन 50 -100 बाल झड़ ही जाते हैं । यही प्रॉब्लम हमे परेशान कर जाती हैं जिसे हम नये नये प्रोडक्ट इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हो जाते हैं मगर रिजल्ट ज़ीरो । जी हां आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर मुख्य रुप से तीन दोष (वात-पित्त-कफ) से बना हुआ है इन्हें दोष कहने का मुख्य कारण भी यही है क्योंकि इनकी साम्यावस्था जहां हमें आरोग्य देती हैं वहीं इनका मात्रा से कम या ज्यादा होना हमारे शरीर मे रोगों को उत्पन्न करता है। बालों के झडने का मुख्य कारण पित्त की अधिकता है । आसान शब्दों में हेयर लॉस (Hair loss) के कारण इस प्रकार गिने जा सकते हैं तो आइए जानते हैं :-
बॉडी फैट या मेद-– आयुर्वेद के अनुसार शरीर सात धातुओं से मिलकर बना होता है जिनमें एक धातु होती है मेद जिसे हम आधुनिक युग में फैट कहते हैं। जब किसी व्यक्ति में मेद धातु की अधिकता हो जाती हैं तो हम जो भी भोजन ग्रहण करते हैं उसका सारा सार मेद में परिवर्तित होने लगता है और वह अपने आगे की धातु जैसे की अस्थि और मज्जा के पोषण को रोक देता है इसीलिए अधिकतर देखा जाता है कि बहुत मेदस्वी या फैटी लोगों के सिर से बाल झड़ने लगते हैं क्योंकि उनमें अस्ति धातु का पोषण नहीं होता और आयुर्वेद के अनुसार बालों को अस्ति धातु का मल कहा जाता है।
कैल्शियम एवं आयरन की कमी– वर्तमान में छरहरा दिखने की चाह में युवक युवतियां जिस प्रकार डाइटिंग की प्रक्रिया को अपना रहे हैं, उसमें शरीर कई पोषक तत्वों से वंचित रह जाता है उन पोषक तत्वों में मुख्य पोषक तत्व है आयरन । शरीर में जब भी आयरन की कमी होगी, लौह धातु की कमी होगी, सिर से बाल अवश्य झड़ेंगे । वही कैल्शियम की कमी के कारण भी बालों का झड़ना (Hair Fall ) आम समस्या है ।
गम्भीर बीमारियाँ — मानव शरीर का एक सिस्टम होता है जिसमें छोटी-मोटी बीमारियों से शरीर बिना दवाइयों के ही लड़ लेता है । इसी प्रकार शरीर का सिस्टम काम करता है जब मानव शरीर किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होता है उस समय शरीर का पूरा ध्यान उस बीमारी से लड़ने में निकल जाता है इसलिए बाकी पोषण अनदेखा रह जाता है और इस प्रकार पोषण के अभाव मे ऐसी गम्भीर बिमारियों जैसे पीलिया, टायफाइड, मलेरिया, विषम ज्वर आदि के बाद बाल झडने लगते हैं ।
त्वचा गत रोग – आयुर्वेद डॉक्टर्स के अनुसार त्वचा से संबंधित जितने भी रोग होते हैं उन सभी में अमूमन बालों का झड़ना पाया ही जाता है इसके मुख्य उदाहरण है– कुष्ठ रोग या लेप्रोसी ल्युकोडर्मा, वायरल इनफेक्शन, दाद- खाज- खुजली रोमांतिका अरुणशिका या रूसी का होना, फन्गल इन्फेकशन इत्यादि।।
त्वचा गत रोग – आयुर्वेद डॉक्टर्स के अनुसार त्वचा से संबंधित जितने भी रोग होते हैं उन सभी में अमूमन बालों का झड़ना पाया ही जाता है इसके मुख्य उदाहरण है– कुष्ठ रोग या लेप्रोसी ल्युकोडर्मा, वायरल इनफेक्शन, दाद- खाज- खुजली रोमांतिका अरुणशिका या रूसी का होना, फन्गल इन्फेकशन इत्यादि।।
रक्तगत रोग– रक्त से सम्बंधित विभिन्न रोगों में एक तो व्याधि के कारण दूसरा रोग को दूर करने के लिये प्रयुक्त एंटीबायोटिक के अति प्रयोग के कारण भी बाल अक्सर समय से पहले झड़ जातें हैं ।
कृमि रोग-– सामान्यतः लोगों में यही धारणा पायी जाती है कि कृमि बच्चों में ही पाये जातें हैं पर ऐसा नही है। बहुत बार बच्चों के साथ ही कई वयस्कों में भी विभिन्न प्रकार के कृमि या वर्म्स पाये जातें है जो बालो के झड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
अन्य कारण–बहुत बार ऐसी कई बीमारियाँ जो शरीर के मेटाबोलिस्म से जुड़ी होती है,उनके कारण भी बालों का झड़ना पाया जाता है। जैसे डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉईड की समस्या में भी बालों का गिरना देखा जाता है। जैसा कि आप सभी ने देखा बालों के झड़ने के यह सारे कारण हैं इन्हीं कारणों में इनके उपचार छिपे हैं। इन कारणों का निदान जैसे जैसे किया जाएगा, वैसे वैसे उपचार मिलता जाएगा। आगे आपको उपचार के बारे में बताते हैं।
यूं तो आयुर्वेद के बेस्ट डॉक्टर्स आपको हर महानगर में मिल जायेंगे लेकिन अगर बात दिल्ली की करें तो डॉ. Chanchal Sharma, Ayurvedic treatment for hair Aasha Ayruveda पंचकर्मा आयुर्वेदिक सेंटर दिल्ली मुख्य हैं ।